शाद ओ ख़ुर्रम एक आलम को किया उस ने 'ज़फ़र'पर सबब क्या है कि है रंजीदा ओ नाशाद तू
Shad o khurram ek aalam ko kiya us ne 'zafar'Par sabab kya hai ki hai ranjida o nashad tu