'आलम-ए-हस्ती को था मद्द-ए-नज़र कत्मान-ए-राज़एक शय को दूसरी शय का सबब करना पड़ा
'alam-e-hasti ko tha madd-e-nazar katman-e-raazEk shai ko dusri shai ka sabab karna pada