अरक़ की बूँद उस की ज़ुल्फ़ से रुख़्सार पर टपकीतअज्जुब की है जागह ये पड़ी ख़ुर्शीद पर शबनम
Araq ki bund us ki zulf se rukhsar par tapkiTajjub ki hai jagah ye padi khurshid par shabnam